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डॉ. विक्रम साराभाई : वह महान वैज्ञानिक जिन्होंने भारत को अंतरिक्ष की राह दिखाई

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“यदि हम अपने देश की समस्याओं का समाधान आधुनिक विज्ञान और तकनीक के माध्यम से करना चाहते हैं, तो हमें अंतरिक्ष विज्ञान को केवल प्रतिष्ठा का विषय नहीं, बल्कि विकास का साधन बनाना होगा।”भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की नींव मजबूत करने वाले महान वैज्ञानिक डॉ. विक्रम साराभाई का जीवन इसी सोच और दूरदृष्टि का प्रतीक है।  डॉ. विक्रम साराभाई कौन थे? डॉ. विक्रम अंबालाल साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में एक प्रतिष्ठित उद्योगपति परिवार में हुआ था। उनके पिता अंबालाल साराभाई और माता सरलादेवी साराभाई सामाजिक एवं औद्योगिक क्षेत्र में सक्रिय थे। बचपन से ही विक्रम साराभाई की रुचि विज्ञान, गणित और मशीनों में थी। प्रारंभिक शिक्षा के बाद उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में प्राकृतिक विज्ञान का अध्ययन किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वे भारत लौटे और वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा में अपना महत्वपूर्ण योगदान शुरू किया।   कॉस्मिक किरणों से शुरू हुआ वैज्ञानिक सफर भारत लौटने के बाद साराभाई ने कॉस्मिक किरणों (Cosmic Rays) पर शोध किया। उन्होंने वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए अहमदाबाद में भौतिक अनुसंधान प्र...

श्यामजी कृष्ण वर्मा कौन थे?

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"क्रांति दृष्टा"- श्यामजी कृष्ण वर्मा का जन्म 4 अक्टूबर 1857 को गुजरात में कच्छ के मांडवी में हुआ था और वह 1857 की क्रांति की कहानी सुन कर ही बड़े हुए थे। बचपन से ही निडर और स्वार्थ रहित व्यक्तित्व वाले बमाँ केवल 20 साल की उम्र में ही क्रांतिकारी गतिविधियों में हिस्सा लेने लगे थे। स्कूल की पढ़ाई खत्म करने के बाद वह आगे की पढ़ाई के लिए ऑक्सफोर्ड चले गए थे। वहां लंदन में घर खोजते हुए उन्हें भेदभाव का सामना करना पड़ा। ऐसे में उन्होंने लंदन में भारतीय छात्रों के रहने के लिए मकान खरीदा और उसका नाम 'इंडिया हाउस' रखा। बाद में चल कर यही 'इंडिया हाउस' इंग्लैंड में क्रांतिकारी गतिविधियों का एक प्रमुख केंद बन गया और काफी लोकप्रिय हुआ। कहा जाता है कि इस छात्रावास में गांधी, लेनिन, लाला लाजपत राय, गोपाल कृष्ण गोखले, सावरकर, मदन लाल श्रींगरा सभी आये थे। यहां भारत को आजादी की योजना को लेकर गंभीर बहस होती थी। वह लोकमान्य तिलक और स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रेरित थे। उन्होंने भारत की आजादी के लिए ना सिर्फ स्वयं को समर्पित कर दिया बल्कि अनेक राष्ट्रवादियों को प्रेरित किया। माना ...

महान स्वतंत्रता सेनानी - वीर सावरकर

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हेलो दोस्तों, आज मैं आपसे भारतीय स्वतंत्रता सेनानी वीर सावरकर के बारे में बात करने वाला हूँ।  तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते है। 28 मई 1883 को महाराष्ट्र में नासिक के निकट भागुर गांव में दामोदर पंत सावरकर के घर विनायक दामोदर सावरकर का जन्म हुआ था। एक क्रांतिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, चिंतक, लेखक, कवि, वक्ता, राजनेता और दार्शनिक के रूप में उन्हें विनायक दामोदर सावरकर के नाम से जाना गया। मैट्रिक की पढ़ाई पूरी कर पुणे के मशहूर फग्र्युसन कॉलेज से बीए किया। 1904 में उन्होंने 'अभिनव भारत सोसाइटी' नाम की संस्था की स्थापना की। राष्ट्रवाद की भावना से प्रेरित सावरकर ने 1905 में बंगाल विभाजन के बाद स्वदेशी का नारा दिया और पुणे में विदेशी वस्त्रों की होली जलाई। बाल गंगाधर तिलक के अनुमोदन पर स्कॉलरशिप मिली तो कानून की डिग्री लेने लंदन चले गए। इसी दौरान उन्होंने 'फ्री इंडिया सोसाइटी' की स्थापना की और भारत को स्वतंत्रता दिलाने के प्रयासों में लग गए। लंदन में उस समय 'इंडिया हाउस' राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र हुआ करता था। इसे श्याम जी कृष्ण वर्मा चला रहे थे। सावरकर यहीं रहत...

भारतीय सिनेमा के जनक - दादा साहेब फाल्के

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हेलो दोस्तों, आज मैं आपसे भारतीय सिनेमा के जनक दादा साहेब फाल्के के बारे में बात करने वाला हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते है। दादा साहेब फाल्के का जन्म, महाराष्ट्र में नासिक के निकट त्र्यंबकेश्वर में 30 अप्रैल 1870 को हुआ था। उनका असल नाम धुंडीराज गोविंद फाल्के था। "द लाइफ ऑफ काइस्ट" फिल्म देखने के बाद उन्हें फिल्म बनाने की प्रेरणा मिली। ऐसे में उन्होंने 1912 में फाल्के फिल्म कंपनी की स्थापना की। उन्होंने 3 मई 1913 को बंबई के कोरोनेशन थियेटर में अपनी पहली मूक फिल्म राजा हरिशचन्द्र का प्रदर्शन किया। जिसके बाद से ही देश मे फिचर फिल्मों का चलन बढने लगा। उन्होंने 1917 में महाराष्ट्र के नासिक हिन्दुस्तान फिल्म कंपनी की नीव रखी। अपने करियर के दौरान इन्होंने लगभग 95 फिल्में और 26 लघु फिल्में बनाई। दादा साहेब फाल्के कि प्रसिद्ध फिल्में राजा हरिशचन्द्र, मोहिनी भस्मासुर, सत्यवान सावित्रि, लंका दहन, श्री कृष्ण जन्म, सेतु बंधन और गंगावतरण है। 1932 में बनी फिल्म सेतु बंधन उनकी आखिरी मूक फिल्म थी। जबकि उन्होंने एकमात्र बोलती फिल्म गंगावतरण 1937 का निर्माण किया। 16 फरवरी 1944 को उ...

प्रीतिलता वाद्देदार कौन थीं?

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हेलो दोस्तों, आज मैं आपसे भारत की स्वतंत्रता के लिए लडने वाली महिलाओं में से एक प्रीतिलता वाद्देदार  के बारे मैं बात करने वाला हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते है। प्रीतिलता  वाद्देदार   का जन्म चटगांव (वर्तमान बांग्लादेश) में 5 मई 1911 को हुआ था। प्रीतिलता  वाद्देदार  भारत की स्वतंत्रता के लिए लडने के लिए हथियार उठाने वाली पहली महिलाओं में से एक थीं। कॉलेज में रहते हुए, वह एक क्रांतिकारी समूह, दीपाली संघ में शामिल हो गईं, जिसने महिलाओं को युद्ध प्रशिक्षण प्रदान किया और उन्हें राजनीतिक रूप से जागरूक किया।कलकत्ता में, वह सूर्य सेन के समूह, भारतीय कांतिकारी सेना (Indian Revolutionary Army) चटगांव शाखा में शामिल हो गई। 1932 में पहाडी यूरोपीय क्लब (यूरोपीय लोगों के लिए एक सामाजिक क्लब) पर इसकी नस्लीय और भेदभावपूर्ण प्रथाओं के लिए हमला करने का निर्णय लिया गया था। प्रीतिलता, हालांकी 21 वर्ष की थीं, उन्हें घेराबंदी करने के लिए प्रशिक्षित 7 से 10 युवाओं के समूह का नेता बनाया गया। 23 सितंबर की रात को, एक आदमी की तरह कपडे पहने, प्रीतिलता ने साहसपूर्वक हमले का...

भारतीय कथक नृत्य कलाकार - सितारा देवी

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 हेलो दोस्तों, कैसे हैं आपलोग? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों आज मै आपसे भारत के महत्वपूर्ण कथक नृत्य कलाकार सितारा देवी के बारे मैं बात करने वाला हूँ तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। (8 नवंबर 1920 -  25 नवंबर 2014) सितारा देवी का जन्म 8 नवंबर 1920 को कोलकाता मैं हुआ था। उनका बचपन का नाम धनलक्ष्मी था। केवल 8 वर्ष की उम्र में ही धनलक्ष्मी का विवाह करा दिया गया था। ससुराल वाले चाहते थे कि धनलक्ष्मी घर के कामकाज में रूची ले। लेकिन उन्होंने स्कूल जाने की जिद ठान ली। नतिजा विवाह टूट गया। वाराणसी के रहने वाले उनके पिता मूल रूप से कथक कलाकार थे, सो बच्ची की रगों मैं भी नृत्य पहले से ही बसा हुआ था। 10 वर्ष की उम्र होने तक वह एकल नृत्य का प्रदर्शन करने लगी। सितारा देवी को पद्यमश्री, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार और कालिदास सम्मान जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। 25 नवंबर 2014 को उनका निधन हो गया।

झलकारी बाई

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 हेलो दोस्तों, कैसे हैं आपलोग? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों, आज मैं आपसे झलकारी बाई के बारे में बात करने वाला हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। झलकारी बाई का जन्म 22 नवंबर 1830 को झांसी के भोजला गांव में हुआ था। वह बडी होकर एक सैनिक और रानी लक्ष्मीबाई की विश्वसनीय सलाहकार बन गई। वह लक्ष्मीबाई की महिला शाखा दुर्गा दल की सेनापति बन गई। उन्होंने प्रथम स्वाधिनता संग्राम में झांसी की रानी के साथ लडते हुए ब्रिटिश सेना के कई हमलों को विफल किया था। कहा जाता है की झलकारी बाई की कद-काठी और चेहरा रानी लक्ष्मीबाई से मिलता जुलता था। यही वजह है कि उन्होंने कई बार अंग्रजों को चकमा देने के लिए रानी का वेश धरा और युद्ध के मैदान में उतरीं। अपनी अंतिम समय में भी वह रानी के वेश में लडते हुए अंग्रजों के हाथों पकड़ी गई और लक्ष्मीबाई को किले से भागने का मौका मिल गया। वह 4 अप्रैल 1857 को वीरगति को प्राप्त हुई। तो दोस्तों, आपको हमारा यह ब्लॉग पोस्ट कैसा लगा? हमें कमेंट में जरूर बतायें। आपका एक कमेंट हमें बहुत ज्यादा प्रेरणा देता है। धन्यवाद।

संथाल विद्रोह के नायक - तिलका मांझी

 हेलो दोस्तों, कैसे हैं आपलोग? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों आज मैं संथाल विद्रोह के नायक - तिलका मांझी के बारे में बात करने जा रहा हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शूरू करते हैं। दोस्तों, तिलका मांझी का जन्म 11 फरवरी क1750 को बिहार में भागलपुर के सुल्तानगंज में एक संथाल परिवार में हुआ था। मांझी का असल नाम जाबरा पहाडिया बताया जाता है। कहते हैं कि तिलका नाम उन्हें अग्रजों ने दिया था। दरअसल पहाडिया भाषा में तिलका का अर्थ गुस्सैल और लाल-लाल आँखों वाला व्यक्ति होता है। दस्ताजों में यह उनकी पहचान बन गई और इतिहास में तिलका नाम अमर हो गया। ब्रिटिश सता के विरूद्ध लंबा संघर्ष करने वाले तिलका मांझी ने अग्रेजों के सामने कभी भी समर्पण नही किया। न ही कभी झुके और न ही डरे। 1778 में उन्होंने पहाडिया सरदारों के साथ मिलकर रामगढ कैंप को मुक्त करवाया था। 1857 की कांति से पहले 1784 में संथाल में उनके नेतृत्व में 'दामिन सत्याग्रह' लडा गया था। वह ऐसा समय था जब अग्रेज किसी न किसी तरह से अपना विस्तार करते जा रहे थे। मां भारती को धीरे-धीरे जंजीरों के बेडियों में जकडने का प्रयास करते ज...

डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम

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  हेलो दोस्तों, कैसे हैं आपलोग? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों आज मैं आपको डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम के बारे मे बताने जा रहा हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। तमिलनाडु के रामेश्वरम के एक सामान्य परिवार मे 1931 मे ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म हुआ। सुप्रसिध्द वैज्ञानिक डॉ. कलाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम, मिसाइल कार्यक्रम और परमाणु क्षमताओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका के कारण मिसाइल मैन के नाम से भी जाना जाता है। डॉ. अब्दुल कलाम 2002 से लेकर 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यरत रहे। सर्वोच्च प्रतिष्ठित पद पर रहते हुए भी वे अच्छी शिक्षा और नई खोज के प्रति अपनी गहरी रूची के कारण जनमानस, विशेषकर युवाओं से बहुत गहराई से जुड़े हुए थे। सामाजिक कार्यो के प्रति लगाव, समर्पण और राष्ट्र के प्रति प्रतिबध्दता जैसे उनके गुणों ने लाखों लोगों को प्ररित किया है। उन्होंने भारत के युवाओं को अपने सपनों को साकार करने के लिए बड़े सपने देखने और कठोर परिश्रम करने के लिए प्रोत्साहित किया। डॉ. कलाम ने यह दिखाया कि भले ही राष्ट्रपति के रूप में उनकी स्थिति स...

चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन

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  नमस्कार दोस्तो, कैसे है आपलोग ? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होगे। दोस्तो, आज मै बात करने वाला हुँ सी पी राधाकृष्णन के बारे मैं, तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते है। सी पी राधाकृष्णन हमारे देश के 15वे उपराष्ट्रपति बने हैं। उनका पुरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन है। उनका जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरूपुर जिला मे हुआ था। उनकी वर्तमान उम्र 68 वर्ष है। सी पी राधाकृष्णन ने छात्र राजनिति से राजनितिक जीवन की शुरूआत की। वे साल 1974 मे 16 साल की उम्र में ही जनसघ से जुड गए थे। 1996 मे राधाकृष्णन तमिलनाडु मे भाजपा के सचिव बने। 1998 मे वे पहली बार कोयबटूर से लोकसभा के लिए चुने गए। 1999 मे वे पुन कोयंबटूर लोकसभा के लिए चुने गए। सी पी राधाकृष्णन तेलगाना, झारखण्ड और महाराष्ट्र के राज्यपाल एव पुडुचेरी के उपराज्यपाल भी रह चुके है। झारखण्ड के राज्यपाल रहते हुए उन्होने राज्य के सभी 24 जिलो का दौरा किया। साथ ही झारखण्ड, पुडुचेरी और महाराष्ट्र मे ट्यूबोक्लोसिस बिमारी समाप्त करने कि दिशा मे महत्वपुर्ण कार्य किए।

नरेन्द्र दामोदर दास मोदी

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नमस्कार दोस्तो, कैसे है आपलोग आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होगे। दोस्तो, आज मैं बात करने वाला हूँ प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के बारे में। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। शुरुआती जीवन - दोस्तो, प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितबर 1950 को गुजरात के वाडनगर मे हुआ था। उनका पुरा नाम नरेन्द्र दामोदर दास मोदी है। उनके पिता का नाम दामोदर दास मूलचद मोदी एव माता का नाम हिरा बैन था। बचपन मे बालक नरेन्द्र को उनके माता-पिता ने बहुत लाड प्यार से पाला था। परिवार कि आर्थिक स्थिती सामान्य थी। उनके परिवार के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना बहुत मुश्किल था। उनके पिता नजदिकी रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। नरेन्द्र मोदी भी अपने पिता की दुकान मे हाथ बटाया करते थे।  शिक्षा और राजनीति - अपनी प्रारभिक शिक्षा उन्होने वाडनगर के नजदिकी विळ्दयालय से प्राप्त की। तथा गुजरात विश्वविळालय से राजनितिक विज्ञान मे स्नातक की पढाया पुरी की। उन्होने मात्र 17 साल की उम्र मे घर छोड दिया और देश के विभिन्न स्थानो मे जाकर सामाजिक कार्यो मे भाग लिया। तकरिबन 2 साल के बाद वे घर लौटे। 1988 मे व...