दूसरा पिछडा जाति आयोग - मंडल आयोग
दोस्तों आज मैं आपसे पिछडे वर्ग के अधिकारों के लिए गठित मंडल आयोग के बारे में बात करने वाला हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। भारत सरकार ने 1979 को दूसरा पिछडा जाति आयोग गठित किया। इसकी अध्यक्षता बिपि मंडल ने की थी और इसी कारण इसे आमतौर पर मंडल आयोग कहा जाता है। इसे भारत में सामाजिक और शैक्षिक दृष्टि से पिछडे वर्ग की पहचान के लिए मापदंड तय करने तथा उनका पिछडापन दूर करने का जिम्मा सौंपा गया। इस आयोग ने, दिसंबर 1980 में, अपनी रिर्पोट तत्कालिन गृह मंत्री ज्ञानी जैल सिंह को सौंपी। रिर्पोट में सभी धर्मो के साढे तीन हजार से भी अधिक जातियों की पहचान की गई और उन्हें सरकारी नौकरीयों और शिक्षण संस्थानों में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की सिफारिश की गई। वर्षों तक कई पार्टियों और सांसद इसे लागू करने की मॉग करते रहे। फिर 1989 में लोकसभा चुनाव हुआ। जनता दल ने अपने चुनाव घोषणापत्र मे वादा किया कि सत्ता में आने पर वह मंडल आयोग की सिफारिश को लागू करेगी। चुनाव के बाद जनता दल की ही सरकार बनी और इसके नेता बीपी सिंह प्रधानमंत्री बने। 7 अगस्त 1990 को प्रधानमंत्री बीपी सिंह ...