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प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

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 हेलो दोस्तों, कैसे हैं आपलोग आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों आज मैं आपको प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के बारे में बताउँगा कि यह योजना क्या है और इसका लाभ कैसे उठा सकते हैं। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना भारत सरकार द्वारा चलाया जाने वाला एक राष्ट्रीय योजना है। इस योजना के तहत युवाओं या नए रोजगार शुरू करने वाले व्यक्तियों को 50 हजार से लेकर 10 लाख रूपये तक के लोन दिए जाते हैं। इस योजना को और आसान बनाने के लिए इसे 3 भागों मे बॉटा गया है। जो इस प्रकार है- शिशु, किशोर और तरूण । शिशु के अंतगर्त 50 हजार से 1 लाख रूपये तक के लोन दिए जाते है। किशोर के अंतगर्त 1 लाख रूपये से 5 लाख रूपये तक के लोन दिए जाते है। और तरूण के अंतगर्त 5 लाख रूपये से 10 लाख रूपये तक के लोन दिए जाते है। इस योजना का आवेदन ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनो तरिकों से किया जा सकता है। ऑनलाइन आवेदन करने के लिए आपको mudra.org.in पर जाकर आप अपना फॉर्म भर कर सबमिट करना होगा। ऑफलाइन आवेदन करने के लिए आपको अपने नजदिकी बैंक मे जाना होगा। वहाँ प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का फार्म भरकर कुछ ज...

भारत निर्वाचन आयोग

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  नमस्कार दोस्तों, कैसे हैं आपलोग? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों आज मैं आपको भारत निर्वाचन आयोग के अधिकारों के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहा हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। निर्वाचन आयोग चुनाव की अधिसूचना जारी करने से लेकर चुनावी नतिजों की घोषणा तक, पुरी चुनाव प्रकिया के संचालन के हर पहलू पर निर्णय लेता है। यह आदर्श चुनाव संहिता लागू कराता है और इसका उल्लंघन करने वाली पार्टीयों या उम्मीदवारों को सजा भी देता है। चुनाव के दौरान चुनाव आयोग सरकार को दिशा निर्देश मानने का आदेश दे सकता है। चुनाव ड्यूटी पर तैनात अधिकारी सरकार के नियंत्रण में न होकर चुनाव आयोग के अधिन काम करते हैं। तो दोस्तों, आपको हमारा यह ब्लॉग पोस्ट कैसा लगा? हमें कमेंट में जरूर बतायें। आपका एक कमेंट हमें बहुत ज्यादा प्रेरणा देता है। धन्यवाद।

राष्ट्रीय गणित दिवस

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दोस्तों, कैसे हैं आपलोग आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होंगे। दोस्तों, आज राष्ट्रीय गणित दिवस है जो कि हमारे देश के गणितज्ञ श्रीनिवास रामानुजन के गणित के क्षेत्र मे किए गए कार्यों को याद करने के लिए मनाया जाता है।   श्रीनिवास रामानुजन का जन्म 22 दिसंबर 1887 को तमिलनाडु के इरोड नाम के गाँव मे हुआ था। उनका बचपन बहुत आर्थिक तंगी से बीता। लाख परेशानियों के बावजुद वे अपनी पढाई-लिखाई मे अव्वल रहे और अपनी पढाई कभी रूकने नही दी। आर्थिक परेशानियों के चलते वे अपनी गणनाओं के लिए कागज नही खरिद सकते थे। इसलिए वे स्लेट का इस्तेमाल करते थे। और स्लेट पर लिखे शब्दों को जब मिटाना होता था तो उसे मिटाने के लिए इधर-उधर कपडा खोजने मे समय बर्बाद न हो इसलिए वे अपनी कोहनी से ही लिखे शब्दों को मिटा दिया करते थे। 1912 में जब वे 24 वर्ष के थे। उन्होंने तब के बहुत से प्रख्यात गणितज्ञों को अपनी पत्रों की एक श्रींखला के द्वारा खुद के खोजे हुए सुत्र और थ्योरी को भेजना शुरू कर दिया। इन पत्रों को तो ज्यादातर लोगों ने तो  अनदेखा कर दिया पर एक अंग्रेज गणितज्ञ जिनका नाम जी. ए. हार्डी था, वे रामानुजन के साथ एक...

चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन

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  नमस्कार दोस्तो, कैसे है आपलोग ? आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होगे। दोस्तो, आज मै बात करने वाला हुँ सी पी राधाकृष्णन के बारे मैं, तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते है। सी पी राधाकृष्णन हमारे देश के 15वे उपराष्ट्रपति बने हैं। उनका पुरा नाम चंद्रपुरम पोन्नुसामी राधाकृष्णन है। उनका जन्म 4 मई 1957 को तमिलनाडु के तिरूपुर जिला मे हुआ था। उनकी वर्तमान उम्र 68 वर्ष है। सी पी राधाकृष्णन ने छात्र राजनिति से राजनितिक जीवन की शुरूआत की। वे साल 1974 मे 16 साल की उम्र में ही जनसघ से जुड गए थे। 1996 मे राधाकृष्णन तमिलनाडु मे भाजपा के सचिव बने। 1998 मे वे पहली बार कोयबटूर से लोकसभा के लिए चुने गए। 1999 मे वे पुन कोयंबटूर लोकसभा के लिए चुने गए। सी पी राधाकृष्णन तेलगाना, झारखण्ड और महाराष्ट्र के राज्यपाल एव पुडुचेरी के उपराज्यपाल भी रह चुके है। झारखण्ड के राज्यपाल रहते हुए उन्होने राज्य के सभी 24 जिलो का दौरा किया। साथ ही झारखण्ड, पुडुचेरी और महाराष्ट्र मे ट्यूबोक्लोसिस बिमारी समाप्त करने कि दिशा मे महत्वपुर्ण कार्य किए।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

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 यह दुनिया का सबसे बडा गैर सरकारी संगठन है, जिसका उळेश्य समाज निमार्ण से राष्ट्र निमार्ण है। डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 में नागपुर में आरएसएस की स्थापना एक स्वयंसेवक आधारित संघ के रूप में की गई थी, जिसक लक्ष्य नागरिकों में सांस्कृतिक जागरूकता, अनुशासन, सेवा और सामाजिक जिम्मेदारियों को बढावा देना था। संघ का मुख्य उद्येश्य देशभक्ति और राष्ट्रीय चरित्र निमार्ण है। यह मातृभूमि के प्रति समर्पण, अनुशासन, संयम, साहस और विरता का संचार करता है। आरएसएस के स्वयंसेवकों ने बाढ, भूकंप और चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और पुनर्वास कार्यो मे सक्रिय रूप से भाग लिया है। इसके अलावा, आरएसएस के विभिन्न सहयोगी संगठनों ने युवाओं, महिलाओं और किसानों को सशक्त बनाने, जनभागिदारी को बढावा देने और स्थानिय सामुदायों को मजबूत बनाने मे योगदान दिया है।

लोकतंत्र

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लोकतंत्र शासन का एक ऐसा रूप है जिसमें शासकों का चुनाव लोग करते हैं। लोकतंत्र में अंतिम निर्णय लेने की शक्ति लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों के पास ही होनी चाहिए। लोकतंत्र निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनावों पर आधारित होना चाहिए ताकि सत्ता में बैठे लोगों के लिए जीत-हार के समान अवसर हों। लोकतंत्र में हर वयस्क नागरिक का एक वोट होना चाहिए और हर वोट का एक समान मूल्य होना चाहिए। लोकतंत्र ही क्यों? लोकतंत्र के खिलाफ तर्क - लोकतंत्र मे नेता बदलते रहते हैं। इससे अस्थिरता पैदा होती है। लोकतंत्र का मतलब राजनैतिक लडाई और सता का खेल है। यहाँ नैतिकता की कोई जगह नही होती। लोकतांत्रिक व्यवस्था इतने सारे लोगों से बहस और चर्चा करनी पडती है की हर फेसले मे देरी होती है। I चुने हुए नेताओं को लोगों के हितों का पता ही नही होता। इसके चलते खराब फेसले होतें है। लोकतंत्र मे चुनावी लडाई महत्वपूर्ण और खर्चीली होती है। इसलिए इसमे भष्ट्राचार होता है। सामान्य लोगो को पता ही नही होता की उनके लिए क्या चिज अच्छी है और क्या चिज बुरी : इसलिए उन्हें किसी चिज का फेसला नही करना चाहिए। लोकतंत्र के पक्ष मे तर्क -  लोकतांत्रिक ...

नरेन्द्र दामोदर दास मोदी

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नमस्कार दोस्तो, कैसे है आपलोग आशा करता हूँ सबकोई स्वस्थ और अच्छे होगे। दोस्तो, आज मैं बात करने वाला हूँ प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी के बारे में। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं। शुरुआती जीवन - दोस्तो, प्रधानमत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म 17 सितबर 1950 को गुजरात के वाडनगर मे हुआ था। उनका पुरा नाम नरेन्द्र दामोदर दास मोदी है। उनके पिता का नाम दामोदर दास मूलचद मोदी एव माता का नाम हिरा बैन था। बचपन मे बालक नरेन्द्र को उनके माता-पिता ने बहुत लाड प्यार से पाला था। परिवार कि आर्थिक स्थिती सामान्य थी। उनके परिवार के लिए दो वक्त का भोजन जुटाना बहुत मुश्किल था। उनके पिता नजदिकी रेलवे स्टेशन पर चाय की दुकान चलाते थे। नरेन्द्र मोदी भी अपने पिता की दुकान मे हाथ बटाया करते थे।  शिक्षा और राजनीति - अपनी प्रारभिक शिक्षा उन्होने वाडनगर के नजदिकी विळ्दयालय से प्राप्त की। तथा गुजरात विश्वविळालय से राजनितिक विज्ञान मे स्नातक की पढाया पुरी की। उन्होने मात्र 17 साल की उम्र मे घर छोड दिया और देश के विभिन्न स्थानो मे जाकर सामाजिक कार्यो मे भाग लिया। तकरिबन 2 साल के बाद वे घर लौटे। 1988 मे व...