भारत में मानसून

हेलो दोस्तों, आज मैं आपसे मानसून के बारे मैं बात करने वाला हूँ। मानसून क्या है? वर्षा कैसे होती है? मानसून कहाँ से आती है और कहाँ चली जाती है? तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।

मानसून शब्द अरबी भाषा के मौसिम से आया है जिसका अर्थ है ऋतु।

वर्षा कैसे होती है?

मानसून का एक वार्षिक चक है। ग्रीष्म ऋतु में एशियाई भूभाग गर्म हो जाता है, जिससे उसपर एक शक्तिशाली निम्न दबाव क्षेत्र बनता है। चूँकी पवन हमेशा उच्च दाब से निम्न दाब की ओर बहती है, इसलिए पवनें ठंडे, उच्च दाब वाले महासागर से गर्म भूभाग की ओर चलती है। ये समुद्री पवनें नमी लेकर आती है, जो गर्म भूभाग पर संघनित होती है और फिर भारी मानसूनी वर्षा होती है। इसलिए मानसून का अर्थ पवनों की अपेक्षा सामान्तया मौसमी वर्षा से होता है।

सर्दियों में यह उलटा हो जाता है, जब स्थलभाग समुद्र की तुलना में शीघ्रता से ठंडा होता है। तब स्थलभाग पर उच्च दबाव क्षेत्र बनता है। जबकी समुद्र अपेक्षाकृत कम दबाव के कारण गर्म रहता है। इससे पवनें विपरीत दिशा में चलती है यानि भूमि से समुद्र की ओर, जिससे एशिया के अधिकाश भाग में शुष्क परिस्थितियाँ बन जाती है।


भारत में मानसून - 

भारत में यह जून की शुरुआत में दक्षिणी सिरे से प्रवेश करती है और कुछ सप्ताह में यह उत्तर की ओर बढती है। जुलाई के मध्य तक यह संपूर्ण उपमहाद्वीप पर फैल जाता है। हालांकि यह सफलता से आगे नही बढता है। पश्चिमी घाट एक प्राकृतिक अवरोध के रूप में कार्य करता है। जिससे उनके पश्चिमी ढलानों पर बहुत अधिक वर्षा होती है। इसे अकसर ग्रीष्मकालिन या दक्षिण-पश्चिम मानसून कहा जाता है। यहाँ दक्षिण-पश्चिम पवनो की दिशा को दिखाता है।

शीत ऋतु के आने पर पवनों की दिशा में बदलाव हो जाता है। इस समय हवाए भूभाग से समुद्र की ओर जाती है। शुष्क हवाएँ दक्षिण भारत में ठड प्रारंभ कर देती है लेकिन इनका एक भाग बगाल की खाड़ी से गुजरते हुए कुछ नमी ग्रहण कर दक्षिण-पूर्व भारत के कुछ भागों में वर्षा करने में सक्षम होता है। इसे शीत या उतर-पूर्व मानसून कहा जाता है।

तो दोस्तों, मानसून के बारे में दी गई ये जानकरी आपको कैसी लगी हमें कमेंट में जरूर बताए।

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