हेलो दोस्तों, आज मैं आपसे अमूल के बारे मैं बात करने वाला हूँ। तो चलिए बिना किसी देरी के शुरू करते हैं।
1940 के आरंभ में आणंद जिले के किसान अपना दूध आस-पास के गाँवों में बेचते थे। वे चिलचिलाती गरमी में दूध बेचने के लिए नजदीक के गाँव तक साइकिल से या पैदल जाया करते थे। हम सभी जानते हैं कि बहुत गर्म मौसम में दूध जल्दी खराब हो जाता है या फट जाता है। किसानों को दूध खराब होने से पहले जल्द से जल्द बेचना पड़ता था। उन्हें कठिन परिश्रम करने के बाद भी बेहद कम आमदनी होती थी। इसलिए उन्हें बिचौलिए पर निर्भर रहना पड़ता था, जो किसानों से बहुत कम कीमत पर अधिक मात्रा में दूध खरीदते और इसे बाजार में बेच देते थे। कई बार किसान बिचौलियों के कारण ठगा या उत्पीड़ित अनुभव करते थे।
एक दिन सभी किसान मिलकर देश के एक बड़े नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल के पास अपनी समस्याएँ लेकर मिलने गए। उन्होंने स्वेच्छा से कार्य करने और बिचौलियों पर निर्भरता को रोकने के लिए एक सहकारी संगठन बनाने का परामर्श दिया। एक सहकारी संगठन की तरह किसान एक समूह के रूप में दूध की बिक्री और खरीद कर सकते थे तथा दूध के संग्रह, प्रसंस्करण और वितरण के लिए इस पूरी प्रक्रिया को अच्छी तरह संभाल सकते थे। किसानों ने सरदार पटेल का परामर्श माना।
उन्होंने आणंद में एक दुग्ध प्रसंस्करण कारखाना स्थापित किया जिसका नाम अमूल (आणंद मिल्क यूनियन लिमिटेड) रखा। अमूल की स्थापना 1946 में श्री त्रिभुवन दास पटेल (अधिवक्ता और स्वतंत्रता सेनानी) तथा डॉ. वर्गीज कुरियन (एक इंजीनियर, जो मुंबई के एक डेयरी कारखाने में काम करते थे) के नेतृत्व में की गई।
इस प्रयास ने किसानों, विशेषकर महिलाओं को एकजुट किया तथा दूध के उत्पादन और बिक्री पर उनका नियंत्रण बढ़ा। दूध उत्पादकों ने सभी मामलों पर सामूहिक रूप से निर्णय लिए, जैसे- दूध का उत्पादन, पाश्चुरीकरण और बिक्री। इन कार्यों को सभी ने आपस में साझा किया जिसके कारण इन सभी की आमदनी बढ़ी। उन्हें अब बिचौलियों की जरूरत नहीं थी और वे एक बड़ा परिवार बन गए।
जैसे-जैसे किसानों ने सहकारी संगठन के लाभों को देखा, वे साथ में जुड़ते चले गए। जब दूध की मात्रा अधिक हो गई, तब किसानों ने इससे अन्य उत्पाद भी बनाने का निर्णय लिया। उन्होंने मक्खन और दूध का पाउडर बनाना आरंभ किया।
वर्तमान में इस सहकारी संगठन के पास अनेक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र और कारखाने हैं, जो भारत के सभी भागों में अनेक प्रकार के उत्पाद तैयार करते हैं। इसके बाद इन उत्पादों का विपणन किया जाता है और पूरे देश की छोटी और बड़ी खुदरा दुकानों में इनकी बिक्री होती है।
तो दोस्तों, अमूल के बारे में दी गई ये जानकरी आपको कैसी लगी हमें कमेंट में जरूर बताए।

1 टिप्पणियाँ
Very good
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